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बेगूसराय में बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे युवक ने की आत्महत्या, मां के इलाज का खर्च बना चिंता की वजह

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बेगूसराय के हैवतपुर गांव में बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे 22 वर्षीय युवक ने आत्महत्या कर ली। परिवार के अनुसार मां के इलाज में 10 लाख रुपये से अधिक खर्च होने की चिंता से वह मानसिक दबाव में था।

बेगूसराय/आलम की खबर:बेगूसराय जिले से एक बेहद भावुक और दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां बिहार पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रहे एक 22 वर्षीय युवक ने कथित रूप से मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। घटना मुफस्सिल थाना क्षेत्र के हैवतपुर गांव की है। मृतक की पहचान रंजन कुमार के रूप में हुई है, जो गांव निवासी राजू महतो का पुत्र था। परिवार और आसपास के लोगों के मुताबिक रंजन पढ़ाई के साथ-साथ बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था और उसका सपना सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना था। लेकिन मां की गंभीर बीमारी और इलाज में लगातार बढ़ते खर्च ने उसे अंदर से तोड़ दिया।

घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं। बताया जा रहा है कि रंजन अपने परिवार का सबसे छोटा बेटा था और घरवालों को उससे काफी उम्मीदें थीं। वह मेहनती और शांत स्वभाव का युवक माना जाता था। परिवार के लोग कहते हैं कि उसने कभी अपनी परेशानियों को खुलकर जाहिर नहीं किया, लेकिन अंदर ही अंदर वह लगातार तनाव में जी रहा था।

परिजनों के अनुसार, रंजन की मां लंबे समय से बीमार चल रही हैं। उनके इलाज के लिए परिवार अब तक करीब 10 लाख रुपये से अधिक खर्च कर चुका था। लगातार इलाज और आर्थिक बोझ के कारण पूरा परिवार तनाव में था। गुरुवार की रात भी घर में इसी विषय पर बातचीत हुई थी। बताया गया कि खाना खाने के दौरान मां ने इलाज में हुए भारी खर्च और आगे की चिंता को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की थी। इस बातचीत का असर रंजन के मन पर गहराई से पड़ा।

रात में खाना खाने के बाद रंजन अपने कमरे में चला गया। परिवार के लोगों को लगा कि वह रोज की तरह आराम करने गया है। लेकिन शुक्रवार की सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो घरवालों को चिंता होने लगी। परिजनों ने कई बार आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद आशंका होने पर दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का दृश्य देखकर परिवार के लोगों के होश उड़ गए। रंजन का शव कमरे में पंखे से रस्सी के सहारे लटका हुआ था।

घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस गांव पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया। घटना के बाद गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

मृतक के भाई गौतम महतो ने बताया कि रंजन पांच भाइयों में सबसे छोटा था। वह पढ़ाई के साथ-साथ बिहार पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि नौकरी मिलने के बाद घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और मां का बेहतर इलाज हो सकेगा। लेकिन लगातार आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव ने उसे इतना कमजोर कर दिया कि उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रंजन काफी जिम्मेदार स्वभाव का था। वह अक्सर परिवार की समस्याओं को लेकर चिंतित रहता था। गांव के युवाओं ने बताया कि वह अपने भविष्य को लेकर गंभीर था और नियमित रूप से तैयारी करता था। लेकिन मां की बीमारी और खर्च को लेकर वह अंदर ही अंदर टूटता जा रहा था। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उसे मानसिक सहारा और उचित काउंसलिंग मिलती, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

मुफस्सिल थाना अध्यक्ष अजय शंकर ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस परिवार के लोगों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।

यह घटना एक बार फिर युवाओं में बढ़ते मानसिक दबाव और आर्थिक तनाव की गंभीर समस्या को सामने लाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवा नौकरी, परिवार की जिम्मेदारी और भविष्य की चिंता के बीच मानसिक दबाव झेल रहे हैं। खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं पर आर्थिक बोझ का असर गहराई से पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार और समाज को ऐसे युवाओं की मानसिक स्थिति को समझने की जरूरत है।

समाजशास्त्रियों का कहना है कि आर्थिक संकट और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण युवा कई बार खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं। ऐसे समय में परिवार, दोस्तों और समाज का सहयोग बेहद जरूरी होता है। मानसिक तनाव को कमजोरी नहीं, बल्कि एक गंभीर समस्या मानकर उसका समाधान खोजने की जरूरत है।

घटना के बाद गांव में हर तरफ सिर्फ रंजन की चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि एक होनहार युवक ने हालात से हार मान ली। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां की बीमारी से पहले ही परेशान परिवार अब बेटे की मौत के सदमे से गुजर रहा है। गांव के लोग लगातार पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। वहीं इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज और व्यवस्था युवाओं के मानसिक दबाव और आर्थिक संघर्ष को समय रहते समझ पा रही है या नहीं।

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